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मेरा राम केवल भजन में मिलेगा लिरिक्स भजन राजन जी महाराज - Mera ram kewal bhajan me milega bhajan lyrics by rajan ji maharaj

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मेरा राम केवल भजन में मिलेगा लिरिक्स भजन राजन जी महाराज - Mera ram kewal bhajan me milega bhajan lyrics by rajan ji maharaj  भजन: राजन जी महाराज जी का नया भजन मेरा राम केवल भजन में मिलेगा   नमन में है तो न नमन में मिलेगा  न पाताल में न गगन में मिलेगा ये नारद की वीणा है कहती युगों से मेरा राम केवल भजन में मिलेगा मेरा राम केवल भजन में मिलेगा कभी ध्रुव कभी भगत प्रहलाद द्वारे कभी जा के सबरी की किस्मत सवारे वे अभिलम्ब आते है दुःख की घडी में  वो पीड़ा और दुःख के रुदन में मिलेगा मेरा राम केवल भजन में मिलेगा मेरा राम केवल भजन में मिलेगा सदा वेदनाओ में आसू समालो किसी भी तरह प्रभु के चरणों में डालो पहूच जाये आहे तेरी बस वहा तक वो आकर के तेरे भवन में मिलेगा मेरा राम केवल भजन में मिलेगा मेरा राम केवल भजन में मिलेगा जो राजन विनय से बुलाते रहेंगे दयालु है राघव जी ये आते रहेंगे रहो नम्र राही और मीठा वचन हो तो प्रभु मेरा मीठे वचन में मिलेगा मेरा राम केवल भजन में मिलेगा ये नारद की वीणा है कहती युगों से मेरा राम केवल भजन में मिलेगा

Lyrics Raghav Lalan Tere Komal Charan | Bhajan | Pujya Shri Prembhushan Ji Maharaj

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Lyrics Raghav Lalan Tere Komal Charan Prembhushan Ji Mahraj राघव ललन  तेरे कोमल चरण  कही कंकरिया गढ़ नहीं जाय  नव राजीव चरण अरुनारी  खेलन बिनु पानही न पधारे  नीरज नयन मोद मंगल अयन  लाल तेरी लेती बलाय  राघव ललन  तेरे कोमल चरण  कही कंकरिया गढ़ नहीं जाय  रबि कर उदित शीश नहीं छाडे  बदन निरख सर सुजस सकुचाहीं  सूरज किरण परे असरन शरण  कहु मुखड़ा नहीं कुम्लाह  राघव ललन  तेरे कोमल चरण  कही कंकरिया गढ़ नहीं जाय  लालन यही आंगन मिल खेलो  कल बल बचन तोतले बोले  चितवन चपल चाल मंजुल मचल  देखि सुषमा सरस सरसाय  राघव ललन  तेरे कोमल चरण  कही कंकरिया गढ़ नहीं जाय  खेलन को अब दूरी न जाओ  ठुमुक ठुमक पग नाच दिखाओ  सूंदर सूयन देव बरसे सुमन  दास गिरधर बलि बलि जाय  राघव ललन  तेरे कोमल चरण  कही कंकरिया गढ़ नहीं जाय 

सबसे ऊँची प्रेम सगाई Bhajan Lyrics by Prembhushan ji maharaj

भजन :  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  श्री प्रेमभूषण जी महराज   Lyrics  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  दुर्योधन की मेवा त्यागे  साग बिदुर घर खाई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  जूठे फल सबरी के खाये  बहुबिध स्वाद बताई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  प्रेम के वश नृप सेवा किन्ही  आप बने हरि नाइ  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  राज सुयज्ञ युधिष्ठिर कीन्हो  काम जूठ उठाई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  प्रेम के वश पार्थ रथ हाक्यो  भूल गए ठकुराई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  ऐसी प्रीती बढ़ी वृन्दावन  गोपियन नाच नचाई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई  सूर्य कोर तेहि ला अपनाही  कहा लगी कर्म बढ़ाई  सबसे ऊँची प्रेम सगाई