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Lyrics नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का भजन | राजन जी महराज

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भजन : नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का  नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का  सदा न रहा है सदा न रहेगा  जमाना किसी का  नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का  आएगा बुलावा तो जाना पड़ेगा  सर तुझको आखिर झुकाना पड़ेगा  वहां  न चलेगा बहाना किसी का  नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का  सोहरत तुम्हारी बह जाएगी ये  दौलत यही पर रह जाएगी ये  नहीं  साथ जाता खज़ाना किसी का  नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का  पहले तो हम अपने आप को संभाले  हक़ नहीं हमको बुराई औरो में निकाले  बुरा है बुरा जग में पता न किसी का  नहीं चाहिए  दिल दुखाना किसी का  दुनिया का गुलशन सदा ही रहेगा  ये तो जहाँ है लगा ही रहेगा  आना किसी का जग में और जाना किसी का  नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का 

Lyrics मिल जाएगी हर ख़ुशी तुझे बहुत ही सुंदर भजन . Rajan Ji Maharaj

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Lyrics : हर ख़ुशी मिल जाएगी तुझे ,  चरणों में झुक जाने के बाद   भजन : राजन जी महराज  हर ख़ुशी मिल जाएगी तुझे  ,  चरणों में झुक जाने के बाद | कुछ नहीं बिगड़े गए तेरा   ,   हरि शरण आने के बाद || प्रेम की मंज़िल के राही  ,  कष्ट पाते है मगर  | प्रेम की मंज़िल के राही , कष्ट पाते है मगर || बीज फलता है सदा ,  मिट्टी में मिल जाने के बाद कुछ नहीं बिगड़े गए तेरा ,  हरि शरण आने के बाद || देख कर  काली घटा को , ऐ भवर मत हो निराश  | बंद कलिया भी खिलेगी , रात ढल जाने के बाद || कुछ नहीं बिगड़े गए तेरा ,  हरि शरण आने के बाद  .....

Lyrics है याद दिल में बराबर तुम्हारी - राजन जी महाराज

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राम कथा के तेइ अधिकारी  जिनके सतसंगति अति प्यारी  संभु चरित सुनि सरस्  सुहावा  भरद्वाज मुनि अति सुख पावा  लिरिक्स :- है याद दिल में बराबर तुम्हारी -- राजन जी महराज  राजन जी महराज  ये दृग बिंदु तुमको खबर दे रहे है |  ये दृग बिंदु तुमको खबर दे रहे है ||  है याद दिल में बराबर तुम्हारी। ......||  नैनन नीर रोमावलि ठाड़ी |  सुनमुनि आज समागम तोरे ||   कहि न जाई जस सुख मानब मोरे|| 

Lyrics चली जा रही है उमर धीरे धीरे भजन | प्रेम्भुषण जी महाराज

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लिरिक्स : चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे पल पल और आठो पहर धीरे धीरे चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे बचपन भी बीता जवानी भी जाये ||  बुढ़ापे का होगा असर धीरे धीरे   ||  चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे तेरे हाथ पावो में बल न रहेगा झुकेगी तुम्हारी कमर धीरे धीरे चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे सिथिल अंग होंगे सब एक दिन तुम्हारे ||  फिर मंद होगी नज़र धीरे धीरे  ||  चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे बुराई से मन को तू अपने हटा ले  || तो बन जाये तेरा जीवन धीरे धीरे ||  भजन कर हरी का तू पल पल प्यारे ||  तो मिल जाएगा वो सजन धीरे धीरे ||  पल पल और आठो पहर धीरे धीरे चली जा रही है उम्र है धीरे धीरे

Lyrics बधईया बाजे आंगने में सोहर by rajan ji maharaj

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Lyrics : बधाईया बाजे  आंगने में  राजन जी महाराज  बधईया बाजे  आंगने में  बधईया बाजे  आंगने में     बधईया बाजे , बधईया बाजे  आंगने में बधैया बाजे चंद्रमुखी मृगनयनी अवध के  चंद्रमुखी मृगनयनी अवध के  तोरत तान तब रागने में बधईया बाजे , बधईया बाजे  आंगने में बधैया बाजे प्रेमभरी प्रमदागन  नाचे प्रमदागन  नाचे ,  प्रमदागन  नाचे नुपुर बांधे पायने में  बधईया बाजे  आंगने में बधैया बाजे नयोछाबर श्री  राम लला जु की  राम लला जु  की , राम लला जु  की  नहीं सकुचावत मांगने में  बधईया बाजे  आंगने में .......  बधैया बाजे सिया अली यह कौतुक देखत  कौतुक देखत  कौतुक देखत  सिया अली यह कौतुक देखत  अब बीती रजनी जागने  में  बधाईया बाजे आंगने में. 

Lyrics भजन करा होई तवन होई हो | प्रेम्भुशन जी महराज भजन

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भजन लिरिक्स  भजन करा होइ तवन होइ हो श्री प्रेम्भुषण जी महाराज भजन भजन करा होइ तवन होइ हो जगतिया में कोई नहीं अपना उमा कहउ मै अनुभव अपना भोले बाबा मैया जी से अनुभव कहे अपना सत हरि भजन जगत सब सपना राम भज करि के रसोई हो जगतिया में कोई महि अपना कोई नहीं अपना , कोई नहीं अपना भजन करा होइ तवन होइ हो जगतिया में कोई नहीं अपना निज अनुभव मै कहउ खगेसा बिन हरि भजन न जाई क्लेशा जिन से स्वरुप बुद्ध होइ हो जगतिया में कोई नहीं अपना कहि के गोसाई बाबा राम कथा गाई के हरि के भजन करा मनवा लगाई के कलजुग से निस्तार तब होइ हो जगतिया में कोई नहीं अपना

Lyrics Sitaram ji ki pyari rajdhani lage ram bhajan by prembhushan ji maharaj

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सीता राम जी प्यारी  राजधानी लागे सीता राम जी प्यारी  राजधानी लागे मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे धन्य कौशल्या धन्य कैकयी धन्य सुमित्रा मइया   .... धन्य सुमित्रा मइया धन्य भूप दसरथ जी के आँगन खेले चारयो भइया मीठी तोतली रसीली प्रभु की बानी लागे , प्रभु की बानी लागे मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे || जन्म भूमि हनुमान गढ़ी की,  सोभा है अति सूंदर ,    स्वम जगत के मालिक बैठे कनक भवन के अंदर सीता राम जी की सोभा सुदगानी लागे प्रभु की कहानी लागे मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे || सहज सुहावन जन्म भूमि श्री  रघुवर रामलला की श्री  रघुवर रामलला की , जानकी महल सुच सूंदर सोभा लक्ष्मण जयुत किला की , रानी कैकई से प्रीत पुरानी लागे सीता राम जी की प्यारी राजधानी लागे मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे || जय सियाराम दंडवत भैया मधुरी बानी बोले मधुरी बानी बोले , करे संत कीर्तन मगन मन गली गली में डोले , सीता राम नाम धुन मस्तानी लागे ... मस्तानी लागे मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे || रघुपति प्रेम प...