मालिक है जो जहाँ का BHAJAN LYRICS - Malik hai Jo jahan ka bhajan lyrics by rajan ji mahraj

 

                           मालिक है जो जहाँ का 

         BHAJAN LYRICS - Malik hai Jo jahan ka 

                       Bhajan lyrics by Rajan Ji Mahraj 

                                                                 


                                                                   मालिक है जो जहाँ का

जिसका है खेल सारा

उसका हो अगर सहारा
मजधार में किनारा
मालिक है जो जहाँ का
जिसका है खेल सारा

मर्जी के जिसके चलते
ये चाँद सूर्य  तारे
हिलता नहीं है पत्ता
पाए बिना इशारा

मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा

मर्जी में उसके अगर तू 
अपनी मिला ले मर्जी
तुझको बनाएँगे 
आँखों का अपने तारा

मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा

मुख फेर क्यों खड़े हो
आ सामने तो देखो
है खड़े पसरे बाहे
इंतज़ार है तुम्हारा

मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा

बस सामने आना है
नहीं कहने की  जरुरत
जो हाले दिल है तेरा
वो जानते है सारा

मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा

पर्दान्सी वे खुद है 
और चाहते न पर्दा
पर्दा अगर हटा दो
फिर देख लो नजारा

मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा

तक़दीर का रोना भी
प्रताप कया है रोना
तकदीर बनाकर भी 
बस पाते एक सहारा 

मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा

उसका हो अगर सहारा
मझधार में किनारा
मालिक हो जहाँ का 
जिसका है खेल सारा









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